मोबाइल इंटरनेट रेवॉल्यूशन की दहलीज पर भारत

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मोबाइल इंटरनेट रेवॉल्यूशन की दहलीज पर भारत

Post by Admin on Thu Jan 16, 2014 8:44 pm

शेली सिंह, नई दिल्ली ईशान गोयल का न्यू इयर शंघाई में गुजरा। वह अक्सर ट्रैवल करते हैं। जिन देशों में अंग्रेजी बोलने वाले कम हैं, वहां गोयल को कम्यूनिकेट करने में काफी दिक्कत होती है। चीन में बोली जाने वाली भाषा मंदारिन से तो उनका साबका ही बहुत कम पड़ा था। हालांकि शंघाई में वह अनजान लोगों से साइन लैंग्वेज में रास्ता नहीं पूछ रहे थे। इस बार उन्हें इसमें आईफोन 5 से काफी मदद मिल रही थी। गोयल ने शहर में आने-जाने के लिए गूगल ट्रांसलेटर की मदद ली। इसकी मदद से उन्होंने पता लगाया कि कहां अच्छा खाना खाया जा सकता है। इसके जरिए गोयल ने कैब भी तलाशी। म्यूजियम जाने के लिए गूगल ट्रांसलेटर की मदद ली और चॉपस्टिक्स के इस्तेमाल के टिप्स भी हासिल किए। ज्यादातर स्मार्टफोन यूजर्स की तरह 31 साल के गोयल जहां भी जाते हैं, फोन उनके साथ रहता है। हालांकि जहां स्मार्टफोन का इस्तेमाल करने वाले कई लोग लैपटॉप और डेस्कटॉप भी यूज करते हैं, वहीं गोयल के लिए मोबिलिटी का मतलब सिर्फ आईफोन 5 है।
गोयल गुड़गांव बेस्ड ट्रैवल ऐंड हॉस्पिटैलिटी रेप्रिजेंटेशन सर्विसेज (टीएचआरएस) कंसल्टेंसी फर्म के सीईओ हैं। उन्होंने बताया कि सुबह के अलार्म से लेकर ट्रैवल टिकट बुक करने, कैब हायर करने, घर से बाहर खाना खाने, शॉपिंग, गेम्स और पढ़ने के लिए वह आईफोन का इस्तेमाल करते हैं। इसमें उन्हें करीब 20 ऐप्स से मदद मिलती है। गोयल ने बताया कि जब तक मेरे पास मोबाइल इंटरनेट (डेटा) है, मुझे वॉइस के जरिये कम्यूनिकेट करने की जरूरत नहीं पड़ती। इस साल मार्च तक गोयल जैसे लोगों की संख्या बढ़कर 15.5 करोड़ और साल के अंत तक 18.5 करोड़ हो जाएगी। इंटरनेट और मोबाइल असोसिएशन ऑफ इंडिया (आईएएमएआई) के मुताबिक मोबाइल इंटरनेट यूजर्स की संख्या इस साल के अंत तक इतनी हो सकती है। असोसिएशन का कहना है कि देश में अभी कुल 87.5 करोड़ लोग मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हैं।
नोकिया इंडिया में मार्केटिंग डायरेक्टर विरल ओझा ने कहा कि देश में इंटरनेट की शुरुआत हुए 17 साल हो चुके हैं। इसके बावजूद फिक्स्ड लाइन ब्रॉडबैंड यूजर्स की संख्या 1.5 करोड़ ही है। इस मामले में भविष्य की टेक्नॉलजी मोबाइल इंटरनेट ही है। एवेंडस कैपिटल की रिपोर्ट का हवाला देते हुए ओझा ने बताया कि 2013 में 15 करोड़ इंटरनेट यूजर्स में से 8.6 करोड़ मोबाइल डिवाइसेज पर इसका इस्तेमाल कर रहे थे। कंसल्टिंग फर्म एटी कियर्नी का कहना है कि 2020 तक भारत में 40 करोड़ इंटरनेट यूजर्स होंगे। तब तक हर महीने डाउनलोड किए जाने वाले ऐप्स की संख्या बढ़कर 90 करोड़ हो जाएगी। अभी एजुकेशन के लिए बच्चे ऐप्स का इस्तेमाल नहीं करते, लेकिन 2020 तक ऐसा करने वालों की संख्या 7.5 करोड़ हो जाएगी। अभी ही करीब एक तिहाई गूगल सर्च मोबाइल पर हो रहे हैं। फेसबुक यूजर्स में से एक तिहाई स्मार्टफोन के जरिये लॉगइन कर रहे हैं। मोबाइल फोन पर यूट्यूब विडियो देखने वालों की भी संख्या इतनी ही है। इस बारे में आइडिया सेल्युलर के चीफ मार्केटिंग ऑफिसर शशि शंकर ने बताया कि देश मोबाइल ब्रॉडबैंड क्रांति के लिए तैयार है।
सस्ती डिवाइस और डेटा पुश यह ग्रोथ सिर्फ इस वजह से नहीं होगी, क्योंकि डिवाइसेज स्मार्ट हो रही हैं और उनकी कीमत भी घट रही है। मोबाइल ब्रॉडबैंड ग्रोथ की सबसे बड़ी वजह यह है कि पिछले एक साल में डेटा कॉस्ट में 90 पर्सेंट की कमी आई है। वहीं डाउनलोड जैसी सर्विस की कॉस्ट 1 रुपए प्रति विडियो तक है। आईएएमएआई के प्रेज़िडेंट शुभो रे ने बताया कि सोशल नेटवर्किंग, ईमेल कम्यूनिकेशन और सस्ते म्यूजिक डाउनलोड के चलते मोबाइल पर डेटा ट्रैफिक बढ़ रहा है।
मार्केट में आज अच्छे डिवाइसेज की कमी नहीं है। इसके साथ ही इंटरनेट यूज करने की कॉस्ट भी कम हो रही है। इससे मोबाइल ब्रॉडबैंड का इस्तेमाल करने वालों की संख्या बढ़ रही है। मिसाल के लिए नोकिया ने 16 लूमिया डिवाइस लॉन्च की है। इनमें 10 पिछले साल आई थीं, वहीं दो तो पिछले हफ्ते ही लॉन्च हुई हैं। कंपनी ने पिछले दो साल में अफोर्डेबल सीरीज के 19 आशा फोन लॉन्च किए थे। ओझा ने बताया कि इनकी कॉस्ट 4,000 से 7,000 रुपये के बीच है। नोकिया आशा 301 का दाम 5,500 रुपये है। यह नोकिया का सबसे सस्ता 3G फोन है। भारतीय हैंडसेट कंपनी कार्बन ने पिछले दो साल में 50 स्मार्टफोन लॉन्च किए हैं, जिनकी कीमत 3,500 से 20,000 रुपये के बीच है।
कार्बन के एग्जेक्युटिव डायरेक्टर एस देवसरे का कहना है कि 2012 में 3जी सर्विसेज की शुरुआत हुई। इसकी सर्विस पहले के मुकाबले काफी बेहतर है। इसलिए क्वॉलिटी प्रॉडक्ट्स की मांग बढ़ी। 3G पर डाउनलोड स्पीड 8 एमबीपीएस के करीब है, जबकि पहले जीपीआरएस और एज सर्विस पर इसकी स्पीड 14-144 केबीपीएस थी। देवसरे ने बताया कि अब 4जी का जमाना आ रहा है। इसमें यूजर्स 3जी की तुलना में 5 गुना तेजी से डाउनलोड कर पाएंगे। इससे मोबाइल फोन पर इंटरनेट का इस्तेमाल करने वालों की संख्या और बढ़ेगी। जहां डाउनलोड की स्पीड बढ़ी है, वहीं डाउनलोड की कॉस्ट में भी तेजी से कमी आई है। पहले जहां एक केबी डाउनलोड के लिए 2 पैसे लगते थे, वहीं अब इसकी कॉस्ट 10 केबी के लिए 2 पैसे हो गई है। यह 2जी और 3जी दोनों पर लागू होती है। यह 2जी के रेट्स में करीब 90 पर्सेंट और 3जी के लिए 33 पर्सेंट की गिरावट आई है।
इसका मोबाइल इंटरनेट यूज पर क्रांतिकारी असर हुआ है। मोबाइल वॉलेट सर्विस प्रवाइडर मोबिक्विक के सीईओ बिपिन बी सिंह ने कहा कि इतनी कम कॉस्ट की वजह से अब डेस्कटॉप प्रासंगिक नहीं रह गया है। इसके अलावा 2013 में ऐप्स की ग्रोथ भी तेज हुई। इससे काफी फर्क पड़ा। लोग अब ऐप और ब्राउजर का फर्क समझने लगे हैं। उन्हें पता चल रहा है कि ऐप यूज करना कितना आसान है। इससे मोबाइल इंटरनेट का इस्तेमाल बढ़ रहा है। मोबिक्विक की सर्विस से यूटिलिटी बिल देने से ऑनलाइन शॉपिंग तक में मदद मिलती है। साल भर में इसका मोबाइल ऐप डाउनलोड दोगुना होकर 20 लाख तक पहुंच गया।
वहीं सब्स्क्राइबर्स की संख्या के लिहाज से देश की सबसे बड़ी मोबाइल सर्विस प्रवाइडर एयरटेल का डेटा ट्रैफिक रेवेन्यू सितंबर 2013 क्वॉर्टर में बढ़कर 9.2 पर्सेंट हो गया। यह जून 2013 तिमाही में 7.4 पर्सेंट था। कंपनी के पास 28.3 करोड़ सब्स्क्राइबर्स (नवंबर 2013 तक) हैं। सितंबर 2013 क्वॉर्टर में आइडिया सेल्युलर के कुल रेवेन्यू में डेटा का योगदान बढ़कर 8.7 पर्सेंट हो गया, जो साल भर पहले 5.4 पर्सेंट था।
क्या मुश्किलें आएंगी इंटरनेट यूजर बेस में तेज बढ़ोतरी की बदौलत भारत इस मामले में चीन के बाद दुनिया में दूसरे नंबर पर पहुंच जाएगा। वह अमेरिका से आगे निकल जाएगा, जहां 17 करोड़ लोग इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं। हालांकि कनेक्टिविटी की क्वॉलिटी की वजह से हर कोई सब कुछ मोबाइल पर नहीं कर पाएगा। इस मामले में गोयल जैसे लोग अपवाद हैं, जिनके पास हाई एंड फोन हैं। ज्यादातर लोगों के पास (90 पर्सेंट) ऐसी डिवाइस है, जिनकी कीमत 5,000 रुपये से कम है। ये या तो फीचर फोन हैं या सिर्फ 2जी सर्विस के लिए अच्छे हैं। फीचर फोन में कोई ब्राउजर नहीं होता। देवसरे का कहना है कि एंट्री-लेवल स्मार्टफोन 2जी बेस्ड होते हैं। आपको 4,000 रुपये से कम में 3जी स्मार्टफोन नहीं मिलेगा। इसकी वजह यह है कि 3जी की चिपसेट की कीमत ज्यादा है। वहीं 3जी फोन के लिए सर्विस प्रवाइडर को रॉयल्टी भी देनी पड़ती है। इसके अलावा एंट्री लेवल फोन की स्क्रीन साइज भी कम होती है। यह अक्सर 3 इंच से छोटी होती है। इस पर टेक्स्ट आसानी से नहीं पढ़ा जा सकता। ऐसे फोन पर क्रिकेट मैच देखना या शॉपिंग साइट ब्राउज करना भी आसान नहीं है।
एक और प्रॉब्लम लोकल लैंग्वेज में कॉन्टेंट की कमी है। आईएएमएआई के रे का कहना है कि किसी भी भाषा में गाने डाउनलोड करने में दिक्कत नहीं होती, क्योंकि यह डेटा डाउनलोड है। हालांकि तमिल में फॉर्म भरना या लोकल लैंग्वेज में ईमेल लिखना चुनौती है। देवसरे का कहना है कि कॉन्टेंट और डिवाइसेज (या यूजर इंटरफेस) के लोकलाइजेशन के बिना 50 करोड़ इंटरनेट यूजर्स का आंकड़ा हासिल करना आसान नहीं होगा। अभी भी 3जी यूजर्स की संख्या बहुत कम है। ओझा का कहना है कि भले ही हमने कम समय में लंबी दूरी तय की है, लेकिन 3जी सर्विस का इस्तेमाल अभी भी सिर्फ 2.2 करोड़ लोग ही कर रहे हैं। मोबाइल इंटरनेट की ग्रोथ में यह सबसे बड़ी दिक्कत है। इसकी पहुंच बढ़ाने के लिए डेटा प्लान को ज्यादा एक्सेसिबल बनाना होगा। कुछ प्रॉब्लम को दूर करने के लिए आइडिया सेल्युलर जैसे सर्विस प्रवाइडर्स खुद 3जी स्मार्टफोन ऑफर कर रहे हैं। इनकी कीमत 5,000 रुपये से शुरू होती है।
दुनिया के दूसरे देशों से तुलना करने पर पता चलता है कि भारत में इंटरनेट की पहुंच अभी भी कम है। आइडिया सेल्युलर के शंकर ने इस मामले में आईटीयू की रिपोर्ट का हवाला दिया। इसमें बताया गया है कि इस मामले में भारत से आगे चीन (17.2 पर्सेंट), सिंगापुर (123 पर्सेंट) , जापान (113 पर्सेंट) और अमेरिका (75 पर्सेंट) हैं। शंकर का कहना है कि हमें डिवाइस को अफोर्डेबल बनाने के लिए इनोवेशन की जरूरत है। इसके साथ ही कॉन्टेंट और ऐप्लिकेशन तक पहुंच बढ़ाने पर भी ध्यान देना होगा।
ब्रिकी (ब्राजील, रूस, इंडिया, चीन, इंडोनेशिया) देशों में 3 अरब लोग रहते हैं, लेकिन इनमें पर्सनल कंप्यूटर्स की संख्या 44 करोड़ ही है। मोबाइल इंटरनेट कनेक्शन बहुत सस्ता पड़ता है और यह यूज करने में भी आसान है। वर्ल्ड बैंक की एक स्टडी के मुताबिक, मोबाइल फोन की पहुंच अगर 10 पर्सेंट बढ़ती है, तो इकनॉमिक ग्रोथ में 0.81 पर्सेंट सालाना की बढ़ोतरी होती है।
अडवाइजरी फर्म गार्टनर में प्रिंसिपल रिसर्च ऐनालिस्ट शालिनी वर्मा ने बताया कि भारत में 3जी सब्स्क्राइबर बेस काफी कम है। भारत में 5 मोबाइल इंटरनेट कनेक्शन में सिर्फ एक 3जी कनेक्शन है। साउथ कोरिया में कुल मोबाइल कनेक्शन में 3जी की हिस्सेदारी 50 पर्सेंट है। वहीं, बाकी के कनेक्शन 3जी हैं। स्मार्टफोन की कीमत कम होने से बेशक भारत में मोबाइल इंटरनेट की ग्रोथ बढ़ी है। वर्मा का कहना है कि 2017 तक हमें भारत में कुल मोबाइल कनेक्शंस में 40 पर्सेंट के 3जी या 4जी होने की उम्मीद है।
मुश्किलें कई हैं, लेकिन वर्मा का मानना है कि एक बार जब यूजर को मोबाइल इंटरनेट की आदत पड़ जाएगी, तो उसके लिए इसे छोड़ना मुश्किल होगा। थाईलैंड और मलेशिया में ऐसा हो रहा है। ऐसा वक्त भी आएगा, जब मोबाइल इंटरनेट पानी और बिजली की तरह जरूरी सर्विस बन जाएगी। इससे उन लोगों का काफी फायदा होगा, जो मोबाइल डिवाइसेज बना रहे हैं और सर्विस बेच रहे हैं। अभी गोयल जैसे आईफोन के दीवानों को भी कई काम के लिए लैपटॉप या डेस्कटॉप की मदद लेनी पड़ती है। गोयल कहते हैं कि मैं हर काम मोबाइल पर करता हूं, लेकिन अटैचमेंट खोलने या डॉक्युमेंट्स एडिट करने के लिए बड़ी स्क्रीन बेहतर होती है। मेरा मानना है कि भविष्य के फोन में प्रोजेक्शन टेक्नोलॉजी होगी, जिससे स्मार्टफोन स्क्रीन की साइज बढ़ाने में मदद मिलेगी। और जब ऐसा होगा, तब मुझे लैपटॉप की जरूरत नहीं पड़ेगी।


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